कविता – जन्माष्टमी

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-मोनिका महाजन

नटखट नटखट माखन चोर ,
बांसुरी बजाता है कान्हा चितचोर ।
यशोदा देवकी उसकी माता,
सारे विश्व का वह पालन दाता।

माखन मिश्री के वह प्यारे ,
गाये चराने साथ सखा सारे।
चारों ओर सब दे रहे बधाई ,
आज जन्माष्टमी की छटा है छाई।

गोपियों के आप दुलारे ,
राधा के प्राण प्यारे ।
नटखट नटखट माखन चोर ,
बांसुरी बजाता काहना चितचोर।

जब भी कष्ट मन में आए,
सखा बनकर आप आए।
चारों और आप ही छाए,
नटखट प्यारा नंदकिशोर ।

आओ इस धरती पर आप ,
संकट हर लो सबके आप ।
जो भी दूरी बना रहे निवासी ,
भक्ति में हो जाए हम भारतवासी।

नटखट नटखट माखन चितचोर,
देश के प्यार का संदेश नया भरो।
रहे ना कोई अब चाहत अधूरी ,
करो सबकी इच्छा पूरी।

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